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मनरेगा बंद करने के फैसले पर कांग्रेस आक्रोशित, 21 दिसंबर से सड़क से सदन तक आंदोलन

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रांची
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर कर ग्रामीण जनता से रोजगार की गारंटी छीनने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन के रोजगार की जो संवैधानिक गारंटी थी, उसे नए प्रावधानों के जरिए समाप्त कर दिया गया है।
के. राजू ने कहा कि पहले यह तय करने का अधिकार ग्रामीण मजदूरों के पास था कि किस गांव में कौन सा काम होगा, लेकिन अब यह निर्णय केंद्र सरकार के हाथ में चला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जहां केंद्र सरकार मनरेगा के लिए 90 प्रतिशत तक फंड उपलब्ध कराती थी, अब उसे घटाकर केवल 60 प्रतिशत कर दिया गया है और वह भी चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है। इससे गरीब और पिछड़े राज्यों में मनरेगा के तहत रोजगार लगभग समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना की पहचान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी, जिसने कोविड काल में लाखों लोगों को रोजगार देकर जीवन रेखा का काम किया, लेकिन अब इसे कमजोर कर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस ने ऐलान किया कि 21 दिसंबर से जिला स्तर पर मनरेगा को लेकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।


इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस स्थापना दिवस के अवसर पर पंचायत, बूथ और प्रखंड स्तर पर कार्यालयों में झंडा फहराया जाएगा। उन्होंने बताया कि संगठन सृजन अभियान झारखंड में अंतिम चरण में है और प्रत्येक ग्राम पंचायत में 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बीएलए की नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण शिविर आयोजित होंगे और 1100 म्युनिसिपल वार्ड गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। 17 जनवरी के बाद सभी प्रखंडों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संवाददाता सम्मेलन में सह प्रभारी सीरीबेला प्रसाद, भूपेंद्र मारावी, सुबोध कांत सहाय, बंधु तिर्की, शहजादा अनवर, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुजनी, सोनाल शांति, रमा खलको सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।


 

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